ध्यान विधि - सम्पूर्ण ध्यान विधि
Tuesday, September 10, 2019
Monday, September 9, 2019
गायत्री मंत्र जप विधि और लाभ
गायत्री मंत्र के जप का पहला समय है सुबह का। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले ब्रह्म मुहूर्त मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए और सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए।
शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले प्रदोष काल में । सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए।
मंंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है। जप से पहले स्नान आदि कर्मों से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए।
ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।
सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते है, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग (सही और सत्य मार्ग ) की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।
उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है।
त्वचा में चमक आती है।
बुराइयों से मन दूर होता है।
हम बुराई के मार्ग से सत्मार्ग की बढ़ते है |
धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है।
पूर्वाभास होने लगता है।
ईश्वर की शक्ति हमारे आस पास रहती है और हमें अनुभव होती है |
आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है।
क्रोध शांत होता है। अनेक प्रकार के रोग शांत होते है,
शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले प्रदोष काल में । सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए।
मंंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है। जप से पहले स्नान आदि कर्मों से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए।
ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।
सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते है, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग (सही और सत्य मार्ग ) की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।
उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है।
त्वचा में चमक आती है।
बुराइयों से मन दूर होता है।
हम बुराई के मार्ग से सत्मार्ग की बढ़ते है |
धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है।
पूर्वाभास होने लगता है।
ईश्वर की शक्ति हमारे आस पास रहती है और हमें अनुभव होती है |
आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है।
क्रोध शांत होता है। अनेक प्रकार के रोग शांत होते है,
Tuesday, September 3, 2019
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